कारागार (Prison) प्रणाली में सुधार और मानवाधिकारों की रक्षा। दण्ड के सिद्धांत:

अपराध के आघात से उबरने के लिए पीड़ितों को चिकित्सा, परामर्श और वित्तीय सहायता प्रदान करना।

दंडशास्त्र जहां अपराधी के इर्द-गिर्द घूमता है, वहीं पीड़ित विज्ञान पीड़ित की सुरक्षा और अधिकारों की बात करता है।

भारत में मामलों में ही मृत्युदंड दिया जाता है (बचन सिंह बनाम पंजाब राज्य)।

दंड के ऐतिहासिक और आधुनिक सिद्धांत।

ये दोनों विषय एक ही सिक्के के दो पहलू हैं:

भारत में अब पीड़ितों के अधिकारों को महत्व दिया जा रहा है।

विश्वविद्यालय ने "अपराधशास्त्र एवं दंडशास्त्र" (Criminology and Penology) पर एक विस्तृत पुस्तक हिंदी में जारी की है, जो अपराध के बदलते स्वरूप और दंड के सिद्धांतों पर केंद्रित है। आप इसे MPBOU आधिकारिक वेबसाइट से प्राप्त कर सकते हैं ।

भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) और अब नए के तहत पीड़ितों के अधिकारों को मजबूत किया गया है। धारा 357 (CrPC) के तहत विक्टिम कंपनसेशन स्कीम (Victim Compensation Scheme) का प्रावधान है, जिसके तहत राज्य सरकारें पीड़ितों को वित्तीय सहायता प्रदान करती हैं।

provides a deep dive into criminal behavior and legal reforms in Hindi. Core Concepts Explained

दंडशास्त्र के मुख्य उद्देश्य

आधुनिक दंडशास्त्र इसी पर आधारित है। इसका मानना है कि "अपराध से घृणा करो, अपराधी से नहीं।" इसके तहत जेलों को सुधार गृह में बदला जाता है।

1. दण्डशास्त्र (Penology) क्या है?

दण्डशास्त्र (Penology) और पीड़ितशास्त्र (Victimology) अपराधशास्त्र (Criminology) की दो महत्वपूर्ण शाखाएँ हैं जो आपराधिक न्याय प्रणाली के विभिन्न पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करती हैं Sathyabama 1. दण्डशास्त्र (Penology)

इसके तहत राज्य सरकार को पीड़ितों या उनके आश्रितों को मुआवजा देने के लिए धन उपलब्ध कराना होता है।