Hindi Full ((free)) — Palitana 5 Chaityavandan In

गिरिराज की चढ़ाई शुरू करने से पहले तलहटी (जयतळायु) पर प्रथम चैत्यवंदन किया जाता है। चैत्यवंदन पाठ:

यात्रा सदैव साफ, धुले हुए और सूती (कॉटन) पूजा के कपड़ों में ही करें।

गिरिराज की यात्रा में दूसरा चैत्यवंदन का करना होता है। यह जिनालय विक्रम संवत 1860 में वैशाख शुद पंचमी के दिन दमण के शेठ श्री हीराचंद रायकरण दमन वालों द्वारा बनवाया गया था। palitana 5 chaityavandan in hindi full

पलिताना के ५ चैत्यवंदन में निम्नलिखित पाँच मंदिर शामिल हैं:

पर्वत चढ़ते और उतरते समय छोटे जीवों की रक्षा (जयणा) का विशेष ध्यान रखें। प्रभु प्रतिमा वंदो

(रायण पगला या आदिनाथ भगवान का स्तवन करें)

रायण वृक्ष के नीचे देवराज इंद्र द्वारा स्थापित प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) के प्राचीन चरण पादुका जी हैं। यहाँ तीसरा चैत्यवंदन होता है। चैत्यवंदन पाठ: रायण हेठे पादुका

यात्रा की शुरुआत शत्रुंजय पर्वत की तलहटी से होती है, जिसे 'जय तलीय' कहा जाता है। ऊपर चढ़ने से पहले यहाँ प्रथम चैत्यवंदन किया जाता है।

एह गिरि ऊपर आदिदेव, प्रभु प्रतिमा वंदो,रायण हेठे पादुका, पूजीने आनंदो। (१)